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गुपचुप तरीके से की गई गोधना शिक्षक भर्ती को निरस्त करने के बाद भी शिक्षकों को अब तक निरस्तीकरण का पत्र नहीं दिया गया है; वेतन रिकवरी के लिए सात दिन में माँगा जवाब


जांजगीर चाम्पा/ शासकीय अनुदान प्राप्त सरस्वती उमावि गोधना में शासन से रोक होने के बाद भी गुपचुप तरीके से की गई भर्ती को निरस्त कर दी गई है बावजूद इन शिक्षकों का निरस्तीकरण प्रमाण पत्र राज्य शासन को नहीं भेजा गया है। जिसके चलते अपर संचालक लोक शिक्षण संचनालय ने डीईओ को कड़ा पत्र भेजकर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है।  विडंबना यह है कि १० माह पहले भर्ती को निरस्त कर दिया गया है लेकिन शिक्षकों को अब तक निरस्तीकरण का पत्र नहीं दिया गया है। इतना ही नहीं इन शिक्षकों को जो वेतन भुगतान किया गया है उसकी रिकवरी के लिए भी आदेश अपर संचालक ने दिया है। बावजूद इस दिशा में कारगर कदम नहीं उठाया जा रहा है। जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। गौरतलब है कि गोधना के अनुदान प्राप्त सरस्वती उमावि में तत्कालीन डीईओ केएस तोमर ने अपने बेटे सहित शिक्षा विभाग के कई कर्मचारियों के रिश्तेदारों को आधा दर्जन से अधिक पदों में गुपचुप भर्ती कर शिक्षक बना दिया था। मामला काफी तूल पकड़ा था। हद तो तब हो गई थी जब डीईओ ने इन शिक्षकों की ज्वाइनिंग कराकर उनका वेतन भी जारी कर दिया था। आपको बता दें कि जब पूरा देश कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा था ठीक उसी समय आपदा को अवसर बनाते हुए तत्कालीन डीईओ केएस तोमर ने शासकीय अनुदान प्राप्त सरस्वती उच्चतर माध्यमिक शाला गोधना में अपने बेटे मनोज प्रताप सिंह तोमर सहित ८ शिक्षकों की भर्ती कर ली थी। मामला जब मीडिया में सुर्खियों में आया तब मौजूदा डीईओ डीके कौशिक ने जांच टीम गठित कर दी। जिसकी रिपोर्ट महीनों बाद ३० नवंबर २०२२ को सामने आया। जिसमें आठ बिंदुओं में जांच रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में डीईओ ने कहा कि जांच में किसी भी मानकों का पालन नहीं किया गया। जिससे भर्ती को निरस्त किया जाए और इन शिक्षकों को वेतन के रूप में जो राशि भुगतान की गई है उसकी रिकवरी की जाए।

इन आठ शिक्षकों से होनी है साढ़े चार लाख की रिकवरी

गौरतलब है कि इन शिक्षकों को ४ लाख ६८ हजार ९६६ रुपए की करनी है रिकवरी की जानी है और इसकी रिपोर्ट राज्य शासन को सात दिन के भीतर देना है। इस आशय का पत्र अपर संचालक ने १७ फरवरी को डीईओ को भेजा है और सात दिन के भीतर जवाब मांगा है।

ेइतना कुछ होने के बाद भी पद पर बने हुए है प्राचार्य

इस संबंध में जब प्राचार्य प्रदीप तिवारी से सवाल किया गया था तो उन्होंने कहा था कि शिक्षकों की भर्ती में अल्प वेतनमान की तरह हजार से १५०० रुपए देने की बात कही थी। लेकिन जब जांच रिपोर्ट सामने आई तो उसमें प्रत्येक शिक्षकों को २०-२० हजार रुपए वेतन के रूप में भुगतान किया गया है। तीन माह में ८ शिक्षकों का ४ लाख ६८ हजार ९६६ रुपए का भुगतान हुआ है।

इन चहेते बेटों को बनाया था शिक्षक

० डीईओ केएस तोमर का बेटा मनोज सिंह तोमर

० पीके तिवारी प्राचार्य गोधना पुत्र श्रीपति तिवारी

० केके सिंह अध्यक्ष समिति का भतीजा राघवेंद्र सिंह

० आनंद शर्मा शिक्षक समिति सदस्य का भाई अमित शर्मा

० रामकृष्ण यादव डीईओ लिपिक का बेटा प्रकाश यादव

० मनहरण लाल थवाईत सहायक ग्रेड 1 के बहनोई विवेक तंबोली

० आरएमएस प्रदीप कुमार शर्मा का भतीजा रोमेश शर्मा शामिल हैं

० रामकृष्ण यादव डीईओ रिटायर्ड लिपिक का बेटी प्रभा यादव

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