अरपा-भैंसाझार बराज को खतरा- तटबंध निर्माण के दौरान से ही लगातार बढ़ रही दरारों से लीकेज से नीचे तालाब बन गया
बिलासपुर/ ठेकेदार की मनमानी और अफसरों की लापरवाही से 1141.90 करोड़ के अरपा-भैंसाझार बराज को खतरा हो गया है। दरअसल इसकी शुरुआत बराज के तटबंध बनाने के दौरान ही उनमें आने वाली दरारों से हो गई थी लेकिन अफसरों ने जानबूझकर इसे नजरअंदाज कर दिया और ठेकेदार को मनमानी करने देते रहे। तटबंध निर्माण के दौरान से ही लगातार बढ़ रही दरारों से लीकेज से नीचे तालाब बन गया है। इससे तटबंध कमजोर होता जा रहा है। तटबंध की जद में 40 से अधिक घर आ रहे हैं।
दिसंबर 2016 से शुरू हुए प्रोजेक्ट का काम 6 साल बाद भी अधूरा है। प्रोजेक्ट की लागत 606 करोड़ से 1141.92 करोड़ पहुंच चुकी और नतीजा यह है कि बराज में नियमों के विपरीत बनाए गए तटबंध के टूटने की आशंका बढ़ गई है। दैनिक भास्कर ने भैंसाझार गांव में बने इस बराज मौके पर जाकर पड़ताल की। 900 मीटर लंबाई वाले तटबंध को बिलकुल खेत के मेड़ के समान बनाया गया है।
तटबंध के दोनों ओर पिचिंग नहीं होने से मिट्टी का कटाव लगातार हो रहा है। तटबंध में कहीं छोटी और कहीं मोटी व लंबी दरारों की संख्या इतनी अधिक है कि गिनना मुश्किल है। तटबंध का बाहरी हिस्सा 15 फीट से अधिक नीचे है जिसमें बीते सात सालों में लगातार लीकेज से एक पूरा तालाब बन गया है। इसका पानी घूमते हुए वापस नदी में जाकर मिलता है। तालाब के करीब 40 से अधिक घर हैं। तटबंध टूटता है तब यह घर इसकी चपेट में आ जाएंगे। मामले में ईई इम्तियाज अली सिद्दीकी से जानकारी लेने के लिए कॉल किया गया लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया।
- अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट: एक नजर
- प्रशासकीय स्वीकृति- 6 जून वर्ष 2012
- काम शुरू हुआ- 13 दिसंबर वर्ष 2016
- मुख्य नहर की लंबाई- 27.5 किलोमीटर
- कितने गांव से गुजरी- 15
- शुरूआती लागत- 606.43 करोड़
- वर्तमान लागत- 1141.90 करोड़
- काम पूरा करने की डेडलाइन- 30 जून 2020
- नाबार्ड द्वारा दिया गया ऋण- 41748.70 लाख रुपए
बराज के तटबंध को नियमों के विपरीत बनने और वर्तमान लीकेज से पैदा हुए खतरा पर जब तत्कालीन कार्यपालन अभियंता आरएस नायडू से पूछा गया तब उन्होंने कहा कि मुझे वहां से आए लंबा अरसा हो चुका है इसलिए यह बताना मुश्किल है कि उस समय तटबंध कैसे बना होगा।
पहले कहा-आइडिया नहीं फिर बोले नाला से बना तालाब
कई सालों तक कोटा डिवीजन में ईई रहे रिटायर्ड ईई अशोक तिवारी कई बार बराज गए होंगे। तटबंध से गुजरे होंगे लेकिन मामले में पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ भी आइडिया नहीं है। फिर कहा नाला से तालाब बना होगा।

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