सिम्स में फिलिफ कैटरर्स ने 90 रुपए थाली के हिसाब से भोजन उपलब्ध कराने का जिम्मा लिया था, गुणवत्ता में बिना कोई सुधार भोजन वैसा ही फिर भी 145 रुपए का भुगतान
बिलासपुर/ छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान यानी सिम्स में खाने-पीने के नाम पर खेल चल रहा है। रायपुर के जिस फिलिफ कैटरर्स को छह साल पहले मरीजों को भोजन उपलब्ध कराने का टेंडर दिया गया, उसने मरीजों को उपलब्ध कराने वाले भोजन की गुणवत्ता तो सुधारी नहीं लेकिन उसके प्रत्येक थाली के पीछे 55 रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई है।
साल 2017 में जब इसका टेंडर किया गया तब ठेकेदार ने 90 रुपए थाली के हिसाब से भोजन उपलब्ध कराने का जिम्मा लिया, लेकिन कुछ साल बाद सिम्स के जिम्मेदार अधिकारियों ने उसे 145 रुपए देना शुरू कर दिया। इसके लिए ऐसी कमेटी तैयार की गई, जिसका कोई वजूद नहीं था।
सिम्स में 2017-18 के भोजन ठेके को दो महीने के लिए बढ़ाया गया है। सत्र की शुरुआत में तो मरीजों को अच्छा भोजन परोसा गया, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे उसकी गुणवत्ता बिगड़ने लगी। जब घटिया भोजन परोसने की बात आई और मरीज इसकी शिकायत करने लगे तब प्रबंधन ने उन्हें नोटिस भी जारी किया। मरीजों द्वारा बताया था कि इसमें भोजन का स्वादहीन होना, पानी मिली दाल व सब्जी भी पहले जैसी नहीं होने की बात कही गई है। फिर भी टेंडर नहीं निकाला गया। हालांकि डीन डॉ. केके सहारे ने बताया है कि इसका टेंडर जारी किया जा रहा है।
कोरोना में 160 की थाली का 330 रुपए भुगतान
कोरोना की दूसरी लहर में सिम्स प्रबंधन और रायपुर के भोजन ठेकेदार के बीच सरकारी दर से अधिक रुपयों का भोजन परोसने और बिल तैयार किया गया। सरकार ने सभी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को हाई प्रोटीन डाइट वाली थाली का दर 160 रुपए तय किया है। लेकिन यहां के स्वास्थ्य कर्मियों को 330 रुपए प्रति थाली के हिसाब से भोजन उपलब्ध करवाया गया और मरीजों को 160 रुपए की थाली परोसी गई। इस तरह ठेकेदार को कुल 23 लाख रुपए ज्यादा भुगतान किया गया।
क्वालिटी सुधरवाएं
"सिम्स में मरीजों के खाने पीने में गुणवत्ता सही नहीं होने की लगातार शिकायतें आ रही थीं। मैंने एसएस शेंडे से इसमें सुधार की बात कही। फिर ऐसा क्यों नहीं किया यह देखता हूं।" -डॉ. केके सहारे, डीन, सिम्स
डीन से जानकारी लेता हूं
"सिम्स में मरीजों काे खाना उपलब्ध कराने वाला ठेकेदार ऐसी लापरवाही क्यों बरत रहा है, जानकारी ली जाएगी। डीन से पूछता हूं, आखिर ऐसा क्यों हो रहा है।" -डॉ. विष्णु दत्त, डीएमई

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