मेडिकल कॉलेजों में सरकारी राशि का जमकर दुरुपयोग, मरीजों के लिए सिर्फ 60 लाख रुपए की खरीदी दवाई लेकिन सुरक्षा, भत्ता और दूसरी चीजों में एक करोड़ 96 लाख रुपए फूंक दिए
बिलासपुर/ बिलासपुर-रायपुर समेत चार मेडिकल कॉलेजों ने इस साल सरकारी राशि का जमकर दुरुपयोग किया है। मरीजों की सुविधाओं को दरकिनार कर उन्होंने पूरे साल सुरक्षा, पेट्रोल और भत्ते के नाम पर खर्च किए गए। अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए 60 लाख रुपए की दवाएं खरीदी गई, लेकिन सुरक्षा, भत्ता और दूसरी चीजों में एक करोड़ 96 लाख रुपए खर्च किए गए। शासन के पास मामला तब पहुंचा जब रायगढ़ मेडिकल कॉलेज ने अतिरिक्त पैसों की मांग कर दी।
जिसके बाद ही डीएमई ऑफिस की तरफ से विभिन्न मदों में बचे पैसों को तत्काल वापसी के निर्देश दिए गए। शासन ने स्पष्ट किया है कि यदि दो दिनों के भीतर सरकारी आवंटन में खर्च के बाद बचे पैसों की वापसी नहीं हुई तो यह वैसे ही लैप्स माने जाएंगे। यह रकम दो करोड़ रुपए के करीब है।
शासन ने हर साल की तरह साल 2022 में मेडिकल कॉलेजों को सीटों और अस्पतालों में मरीज की सुविधाओं के हिसाब से पैसों का आवंटन किया है। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग भिलाई को जहां ज्यादा पैसों का भुगतान किया गया है वहीं इनके मुकाबले राजनांदगांव को कम पैसे मिले। रायपुर के डीएमई ऑफिस से भेजी गई सूची के हिसाब से सभी मेडिकल कॉलेज को हर मद में अलग-अलग राशि भेजी गई। जिसे चार कैटेगरी चिकित्सा प्रतिपूर्ति भत्ता, तेल, सुरक्षा और दवाओं में बांटा गया है।
आंकड़ों पर गौर करें तो शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय सबद्ध चिकित्सालय रायपुर को चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए 40 लाख रुपए दिए गए। बिलासपुर मेडिकल काॅलेज को 20 लाख और राजनांदगांव और दुर्ग को कम पैसे मिले। इसके अलावा पेट्रोल के नाम पर रायपुर मेडिकल कॉलेज को 10 लाख, बिलासपुर मेडिकल कॉलेज को 12 लाख रुपए भेजे गए।
जबकि सुरक्षा के नाम पर सभी मेडिकल कालेजों को दवाओं के बराबर पैसे दिए गए। रायपुर मेडिकल कॉलेज को सुरक्षा के लिए दो करोड़ 70 लाख, बिलासपुर को डेढ़ करोड़, जबकि राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज को सिर्फ दो लाख और दुर्ग भिलाई को एक करोड़ 70 लाख दिए गए पर हर जगह खर्च का विवरण अलग- अलग है।
सुरक्षा पर दुर्ग में सबसे ज्यादा 65 लाख खर्च
रायपुर में भत्ते के नाम पर 40 लाख रुपए का आवंटन दिया गया है। इनमें साल 2022 में 6, 65000 खर्च हुए हैं। पेट्रोल के नाम पर दस लाख रुपए में 4, 48000 खर्च किए गए हैं। सुरक्षा के नाम पर दो करोड़ 70 लाख मिले हैं, जिनमें 54 लाख खर्च हो चुके हैं। दवाओं के एक करोड़ 30 लाख आवंटन में सिर्फ 517000 की खरीदी हुई है। बिलासपुर में चिकित्सा प्रतिपूर्ति भत्ता 20 लाख मिला है, जिनमें 1636000 खर्च हो चुके हैं। पेट्रोल के 12 लाख आवंटन में 448000 खर्च हुए हैं। सुरक्षा के नाम पर मिले डेढ़ करोड़ के आवंटन में 29 लाख 70 हजार खर्च हुए हैं। जबकि राजनांदगांव में इसके नाम पर कोई पैसा खर्च नहीं हुआ। दुर्ग भिलाई ने अकेले 65 लाख 95 हजार रुपए सुरक्षा के नाम पर खर्च किए हैं।
सिम्स में 2.5 लाख मरीजों का इलाज
सिम्स का दावा है कि वर्ष 2022 में साढ़े तीन लाख मरीजों की जांच और इलाज हुआ। ओपीडी में 3 लाख मरीज जांच कराने पहुंचे। आईपीडी में करीबअ 33 हजार मरीज आए। बिलासपुर में जिन मरीजों की दवा खरीदी और अन्य पर इन्हीं के नाम पर 40 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हुए हैं।
सुविधा और संसाधनों की कमी
शासन हर साल मेडिकल कॉलेज में मशीनों के नाम पर अलग फंड भेज रहा है। फिर भी मरीज और मेडिकल छात्र परेशान हो रहे। बिलासपुर, रायपुर, अंबिकापुर, दुर्ग रायगढ़ और राजनांदगांव के मेडिकल कॉलेजों में कई तरह की कमियां हैं।
हमने सिर्फ फंड दिया, खर्च का अधिकार डीन और अधीक्षक का
"शासन के निर्देश पर हमने सिर्फ फंड अलॉट करने का काम किया है। खर्च का अधिकार डीन और अधीक्षक का है। वैसे मरीज हित में पैसे खर्च हों तो ज्यादा बेहतर है। इसके लिए लगातार हर मेडिकल कॉलेज को निर्देशित किया जा रहा है।" - डॉ. विष्णु दत्त, डीएमई

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