मरवाही वन मंडल में रोपणी वन प्रबंधन समिति चिचगोहना और नेचर कैंप प्रबंधन समिति बनाकर करोड़ों का घोटाला, 3 डिप्टी रेंजर, 1 फारेस्ट गार्ड सस्पेंड
बिलासपुर।मरवाही वनमंडल में फर्जी वन प्रबंधन समिति बनाकर 7 साल में करोड़ों रुपए का घाेटाला करने वाले वन विभाग के 2 एसडीओ, 3 रेंजर, 3 डिप्टी रेंजर और 1 फारेस्ट गार्ड को दोषी करार देते हुए कार्रवाई शुरू की गई है। प्रथम दृष्टया गड़बड़ी पाए जाने के बाद सीसीएफ ने 3 डिप्टी रेंजर और डीएफओ ने 1 फारेस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया है। वहीं एसडीओ और रेंजरों पर कार्रवाई के लिए प्रस्ताव बनाकर पीसीसीएफ कार्यालय भेजा गया है।
इसमें चर्चित एसडीओ संजय त्रिपाठी भी शामिल हैं। कुल कितने का घोटाला इन सबने किया है यह स्पष्ट नहीं हुआ है इसकी जांच अभी जारी है। मरवाही वनमंडल में फर्जी वन समिति बनाकर शासकीय राशि के दुरूपयोग का यह सिलसिला वर्ष 2016-17 में शुरू हुआ। इसमें मरवाही वन मंडल में रोपणी वन प्रबंधन समिति चिचगोहना और नेचर कैंप प्रबंधन समिति जामवंत माड़ा गगनई साल्हेकोटा परिसर में फर्जी समिति बनाई जिसमें सिर्फ दो ही सदस्य रखे गए।
इनमें दोनों समितियों के अध्यक्ष गांव के थे लेकिन दोनों का सचिव फारेस्ट गार्ड सुनील चौधरी को बनाया गया था। इस समिति को बनाने के लिए न तो पंचायत से न समिति से प्रस्ताव पारित हुआ था और न ही डीएफओ से अनुमति ही ली गई थी। फर्जी वन प्रबंधन समिति को हर साल बाकायदा राशि का भुगतान भी होता रहा है।
समिति पौधरोपण के काम भी फर्जी तरीके से दिखाती रही। हाल ही में नेचर कैंप प्रबंधन समिति ने खाते से 42 लाख रुपए की राशि का आहरण किया और उसमें से कुछ भुगतान किया। इसी दौरान शिकायत हुई कि दोनों समितियां फर्जी तरीके से काम कर रही हैं और करोड़ों रुपए का घोटाला कर चुकी है। इस पूरे मामले में बैंक प्रबंधन की भूमिका भी संदिग्ध है। इसकी भी जांच की जा रही है।
5 पर कार्रवाई की अनुशंसा
डीएफओ सत्यदेव शर्मा ने बताया कि जांच की कमेटी की अनुशंसा के आधार पर सीसीएफ राजेश चंदेले ने डिप्टी रेंजर इंद्रजीत सिंह कंवर, द्वारिका प्रसाद और अश्वनी दुबे को और डीएफओ ने फारेस्ट गार्ड सुनील चौधरी को निलंबित किया है। इसके अलावा एसडीओ रहे संजय त्रिपाठी, अरूप चटर्जी, रेंजर रामकुमार बंजारे, मानसिंह श्याम, दरोगा सिंह मरावी पर कार्रवाई के लिए पीसीसीएफ को प्रस्ताव भेजा गया है।
तीन सदस्यीय समिति ने की मामले की जांच
सीसीएफ राजेश चंदेले ने शिकायत की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई, जिसमें बिलासपुर डीएफओ, जांजगीर और मरवाही एसडीओ को शामिल किया। जांच में तीनों सदस्यों ने प्रथम दृष्टया ही गड़बड़ी पकड़ी कि समिति ही फर्जी है। इस आधार पर एसडीओ, रेंजर, डिप्टी रेंजर, फारेस्ट गार्ड सहित कुल 9 लोगों को दोषी मानते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की गई।

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