गरियाबंद/मैनपुर के मदांगमुड़ा गांव के रहने वाले 65 वर्षीय गुंचु यादव कुष्ठ रोग से ग्रसित हैं। खबर प्रकाशन के बाद प्रसाशन हरक़त में आया। बुधवार सुबह मैनपुर बीएमओ गजेंद्र ध्रुव के नेतृत्व में स्वास्थ्य अमला पीड़ित के पास पहंच गया। स्वास्थ्य अमला के समझाइश के बाद गुंचु की पत्नी लोचनी, बेटा घेनुराम और लखन लाल मरीज के साथ रहने को तैयार हुए। जिसके बाद एम्बुलेंस के जरिए मरीज को जिला अस्पताल भेजा गया।
पिछले 5 वर्षों से उनका इलाज चल रहा है। गुंचू के बेटे घेनुराम का कहना है कि पिता को कुष्ठ रोग है, उनका पैर सड़ता जा रहा है। हमने अपनी हैसियत के मुताबिक पिता का इलाज निजी अस्पतालों में कराया, लेकिन पिता का पैर ठीक नहीं हो रहा है। हमने दो बार पिता के पैर का ऑपरेशन भी कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। गांव वालों ने यह कहना शुरू कर दिया था, कि तुम्हारे पिता की वजह से यह कुष्ठ रोग पूरे गांव में फैल जाएगा।
गांव वाले अब हमें रोज ताने मारने लगे थे। हमें डर था कि अगर पिता की मौत हो जाती है तो गांव का एक भी व्यक्ति कांधा देने नहीं आएगा। इसलिए मजबूरी में पिता को श्मशान घाट के सामने झोपड़ बना कर रखना पड़ा। हमने 12 दिन पहले ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर दी है। पिता को बेटों की मां दोनों वक्त का खाना उनकी थाली में डालने जाती है।
दिसंबर में चला कुष्ठ उन्मूलन अभियान, बुजुर्ग पर नहीं पड़ी नजर
सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिसंबर माह में स्वास्थ्य विभाग ने 20 दिनों तक कुष्ठ उन्मूलन व जागरूकता कार्यक्रम चलाया, जिसमें ऐसे रोगी की पहचान के लिए सर्वे भी कराया जाना था, जो कुष्ठ रोगों से ग्रासित हों। लेकिन विभाग की नजर इस बुजुर्ग पर नहीं पड़ी है। यह विभाग के अभियान की पोल खोल रही है। हालांकि आसपास के गांवों में यह बात फैली तो विभाग बुजुर्ग से मिलने पहुंचा।
बुजुर्ग को कुष्ठ रोग नहीं है, गैंगरीन की समस्या है। उन्हें जिला अस्पताल लाया गया है। इनका इलाज जारी है। जरूरत पड़ी तो रायपुर भेजा जाएगा।
मनमोहन सिंह ठाकुर, जिला कुष्ठ रोग अधिकारी

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