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तालिबान में एक फुटबॉल स्टेडियम दिखा खचा-खच पर फुटबॉल मैच के कारण नहीं दंड दिए जाने के कारण - चोरी का आरोपी और दूसरे अवैध संबंध बनाने वालों को कोड़े मारे

काबुल/ अफगानिस्तान में मंगलवार को तालिबान ने एक फुटबॉल स्टेडियम में भारी भीड़ के सामने चार लोगों के हाथ काट दिए। इन सभी पर चोरी का आरोप था। द सन की रिपोर्ट के अनुसार, गवर्नर कार्यालय के एक प्रवक्ता हाजी जैद ने बताया कि इसके अलावा स्टेडियम में अवैध संबंध बनाने के आरोपी 5 युवकों को 35-39 बार कोड़े भी मारे गए।

यह घटना कंधार के अहमद शाही स्टेडियम में हुई। सजा के समय तालिबान के अधिकारी, धार्मिक मौलवी, बुजुर्ग और स्थानीय लोग स्टेडियम में मौजूद थे। मानवाधिकार अधिवक्ता और अफगान पुनर्वास मंत्री और शरणार्थियों के मंत्री के पूर्व नीति सलाहकार शबनम नसीमी ने इस घटना की तस्वीर शेयर की है। इसमें देखा जा सकता है कि 9 लोग घास पर बैठे अपनी सजा का इंतजार कर रहे हैं।

'इतिहास खुद को दोहरा रहा'

अफगानिस्तान के पत्रकार तजुदेन सोरौश ने ट्विटर पर स्टेडियम के बाहर के दृश्य की एक तस्वीर भी शेयर की और कहा- इतिहास खुद को दोहरा रहा है। 1990 के दशक की तरह तालिबान ने सार्वजनिक दंड देना शुरू कर दिया है।

पिछले महीने दी पहली सार्वजनिक फांसी

तालिबान ने दिसंबर में हत्या के दोषी व्यक्ति को फांसी दे दी थी। तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद यह पहली सार्वजनिक फांसी थी। द सन की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी फराह प्रांत में हत्या के आरोपी व्यक्ति पर लोगों से खचाखच भरे स्टेडियम में मृतक व्यक्ति के पिता ने तीन बार एसॉल्ट राइफल से गोली चलाई और उसे मार दिया। सरेआम पब्लिक में दी गई इस सजा को देखने के लिए तालिबान के कई नेता मौजूद रहे।

अफगानिस्तान में सरेआम सजा का चलन वापस लौटा

तालिबान के अफगानिस्तान में कब्जे के बाद से सरेआम सजा देने का चलन वापस लौटा है। 24 नवंबर को तालिबान ने फुटबॉल स्टेडियम में हजारों की भीड़ के सामने 12 लोगों को नैतिक अपराधों का आरोपी बताकर पीटा था। इन 12 लोगों में 3 महिलाएं भी शामिल थीं। तालिबानी अधिकारी के मुताबिक इन लोगों पर चोरी, एडल्टरी और गे सेक्स के आरोप लगे थे।

नवंबर, 2022 में 19 लोगों को मिली थी ऐसी सजा

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर में अफगानिस्तान के तखार प्रोविंस से भी ऐसा मामला सामने आया था जिसमें 19 लोगों को सरेआम सजा दी गई थी। नुरिस्तान प्रोविंस में एक महिला को म्यूजिक सुनने के आरोप में पीटा गया था। ये सारी सजाएं शरिया कानून के मुताबिक दी जा रही हैं।

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