रायगढ़। सरकारी सिस्टम में भ्रष्टाचार किस कदर हावी हो चुका है उसका एक उदाहरण पुसौर जनपद पंचायत में नजर आया है। ग्राम पंचायतों के लिए जो सफाई रिक्शा खरीदे गए, उसकी सप्लाई वहीं के एक बाबू ने की। पूर्व सीईओ के कार्यकाल में यह कारनामा हुआ है। रिक्शा की क्वालिटी घटिया होने के बावजूद 50 हजार रुपए की दर से भुगतान भी हो गया। हैप्पी किसानी फर्म से रिक्शा सप्लाई करके बाबू ने सबको हैप्पी कर दिया है।
गांवों को साफ रखने के लिए वहां भी सफाई रिक्शा की खरीदी का आदेश दिया गया। भले ही ग्राम पंचायतों में कचरा एकत्र कर उसके निपटारे की कोई व्यवस्था न हो लेकिन रिक्शा खरीदी के लिए झट से मंजूरी दी गई। पुसौर जनपद के पूर्व सीईओ नितेश उपाध्याय के कार्यकाल में 30 पंचायतों के लिए 47 रिक्शा खरीदने का आदेश दिया गया। इसकी सप्लाई करने का ठेका किसी और ने नहीं बल्कि पुसौर जनपद के सहायक ग्रेड तीन हेमकुमार चौधरी ने लिया। प्रति रिक्शा 50,700 रुपए की दर से सप्लाई भी कर दी गई। हेमकुमार ने जनपद सीईओ को प्रभाव में लेकर रिक्शा सप्लाई की है। पडिग़ांव निवासी हेमकुमार ने वहीं फेब्रिकेशन भी खोला है। हैप्पी किसानी के नाम से फेब्रिकेशन यूनिट खोली गई है। यहां केवल रिक्शा ही नहीं बनाए जा रहे हैं बल्कि ग्राम पंचायतों को डस्टबिन भी सप्लाई किए जा रहे हैं। सामग्रियों के निर्माण में गुणवत्ता का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं है।
कोटेशन के आधार पर कर ली खरीदी
चुपचाप हुई खरीदी में नियमों का ध्यान ही नहीं रखा गया। 47 रिक्शा के लिए करीब 23 लाख रुपए का वारा-न्यारा किया जा चुका है। जनपद में बाबू हेमकुमार ने अपने ही फर्म के नाम पर कोटेशन डालकर रिक्शे भेज दिए। पंचायत सचिवों ने इसका भुगतान भी कर दिया। अब जिला पंचायत से कई सचिवों को नोटिस दिया गया है।
क्या कहते हैं नितेश
उस समय खरीदी का कोई नियम नहीं था। इसलिए हेमकुमार से सप्लाई करवाई गई। ई-मानक पोर्टल तब था ही नहीं।
– नितेश उपाध्याय, पूर्व जपं सीईओ पुसौर
क्या कहते हैं महेश
मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। मेरे कार्यभार संभालने के पहले ही रिक्शा सप्लाई किया जा चुका था। मुझे कुछ भी मालूम नहीं कि बाबू ने कैसे सामग्री सप्लाई कर दी।
– महेश पटेल, जपं सीईओ पुसौर

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