रायपुर/ आजीविका का साधन भी समूहों को मिलेगा और आय भी बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि मशरुम की जिले में काफी डिमांड है। खासकर पैरा पुटू तो हाथों-हाथ बिक जाता है। जो सीजन में 5 से 6 सौ रुपए किलो तक बिकता है। जिससे अच्छा मुनाफा हो जाता है। जिले में भी मशरुम उत्पादन करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। किसान स्वयं भी इस व्यवसाय से जुड़ने आगे आ रहे हैं। इसमें उद्यानिकी विभाग की भी बड़ी भूमिका अब हो गई है।
धान उत्पादन के क्षेत्र के प्रदेशभर में प्रसिद्ध जांजगीर-चांपा कृषि अब मशरुम उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिले (सक्ती भी शामिल) को पहली बार नेशनल हार्टिकल्चर मिशन (एनएचएम) के तहत स्पेशल प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। इसके तहत आठ पंचायताें को चिन्हांकित किया गया है, जहां मशरुम यूनिट तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए एक करोड़ 60 लाख रुपए की राशि उद्यानिकी विभाग को दी गई है। जिसे विभाग के द्वारा ग्राम पंचायतों को जारी किया गया। 2 हजार स्केवयर फीट के यूनिट के निर्माण के लिए 20 लाख रुपए दिए गए है। जिसमें बिल्डिंग निर्माण से लेकर ट्रायर, रेक समेत अन्य सामग्री शामिल है। यहां पंचायतों के माध्यम से महिला समूहों या किसानों को मशरुम उत्पादन की दिशा में जोड़ा जाएगा।
इस तरह आजीविका का साधन भी समूहों को मिलेगा और आय भी बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि मशरुम की जिले में काफी डिमांड है। खासकर पैरा पुटू तो हाथों-हाथ बिक जाता है। जो सीजन में 5 से 6 सौ रुपए किलो तक बिकता है। जिससे अच्छा मुनाफा हो जाता है। जिले में भी मशरुम उत्पादन करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। किसान स्वयं भी इस व्यवसाय से जुड़ने आगे आ रहे हैं। इसमें उद्यानिकी विभाग की भी बड़ी भूमिका अब हो गई है।
इन पंचायतों में बन रही मशरुम यूनिट
दोनों जिले के मालखरौदा ब्लॉक में ग्राम पंचायत पिरदा, जैजैपुर ब्लॉक में ग्राम पंचायत ओड़ेकेरा और परसदा, अकलतरा ब्लॉक में ग्राम पंचायत तरौद, नवागढ़ ब्लॉक में ग्राम पंचायत पेण्ड्री, पामगढ़ ब्लॉक में ग्राम पंचायत चोरभट्ठी, बलौदा ब्लॉक में ग्राम पंचायत चारपारा और बम्हनीडीह ब्लॉक में ग्राम पंचायत गोविंदा में मशरुम यूनिट तैयार किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत साग-सब्जी और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने बड़े स्तर पर किया जाता है और काफी बड़ी राशि दी जाती है। इसीलिए प्रदेश के अन्य जिले इस मिशन में शामिल हैं। जांजगीर-चांपा जिला अब तक शामिल नहीं था। क्योंकि यहां धान की खेती अधिक होती है इसलिए एनएचएम के तहत बड़े प्रोजेक्ट के लिए बड़े जमीन की जरुरत पड़ती है और काम नहीं हो पाता। लेकिन पहली बार जिले के लिए छोटे स्तर पर स्पेशल प्रोजेक्ट के तहत जिले को मिशन में शामिल करते हुए मशरुम उत्पादन को बढ़ावा देने काम किया जा रहा है।

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