बालोद/ जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर ग्राम भरदाकला में बापू की तस्वीर लगाकर बनाए गए 6 चबूतरे में भ्रष्टाचार हुआ है। रेत की जगह मुरूम डाला गया। कृषि केंद्र से मिक्सर मशीन, सीमेंट, रेत, गिट्टी, टाइल्स, रंगाई, पोताई, लोहा, सेंटरिंग सामान मटेरियल खरीदी का बिल लगाकर काम पूरा बताकर राशि का आहरण कर लिया गया। जिसकी पुष्टि केंद्रीय मनरेगा टीम की जांच रिपोर्ट में भी हुई है। जांच की रिपोर्ट शिकायतकर्ता पूर्व विधायक राजेंद्र राय सहित अफसरों व संबंधितों को भेजी गई है। हालांकि विभागीय अफसर मौन हैं, क्योंकि मामला एक साल पुराना है।
आलम यह है कि इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं पहले पदस्थ अफसरों का तबादला भी हो चुका है। वर्तमान अफसर जांच रिपोर्ट मिलने की बातें कह रहे हैं। वहीं मनरेगा के एपीओ का दावा है कि जांच में कुछ सामने नहीं आया। सरकारी रिकार्ड में भरदाकला के धान खरीदी केंद्र में मनरेगा व सहकारी बैंक के फंड से 6 चबूतरा निर्माण के लिए सत्र 2020-21 में 12 लाख रुपए की स्वीकृति मिली थी। इसमें 1.20 लाख रुपए सहकारी बैंक की ओर से स्वीकृत किया गया था।
जुलाई 2021 में जांच करने के लिए पहुंची थी केंद्रीय टीम
7 जुलाई 2021 को महात्मा गांधी नरेगा नई दिल्ली के अवर सचिव सोनाली दत्ता ने टीम के साथ चबूतरा निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें अनियमितता मिली। संबंधितों से बयान लेकर रिपोर्ट तैयार किया। जिसमें अनियमितता का जिक्र कर संबंधितों से राशि वसूली करने निर्देश दिए गए है। हालांकि राशि वसूली नहीं हो पाई है, और ना हीं इस संबंध में अफसर कुछ बता पा रहे है।
कृषि केंद्र में दवा मिलती है लेकिन मटेरियल खरीदी का जिक्र
भले ही जांच रिपोर्ट को विभागीय अफसर छिपा रहे है, लेकिन भास्कर के हाथ सारे दस्तावेज व बिल है। जिसमें भ्रष्टाचार की पोल खुल चुकी है। कृषि केंद्र में दवाई मिलती है, लेकिन राशि आहरण के लिए कृषि केंद्र से मिक्सर मशीन, सीमेंट सहित अन्य मटेरियल सामान खरीदी का जिक्र कर बिल लगाया गया। दिलचस्प यह है कि राशि भी आहरित कर ली गई। इसके अलावा रेशियो नियम का पालन भी नहीं किया गया।
मनरेगा के नियम अनुसार मजदूरी में 60% और मटेरियल में 40% राशि खर्च करना है, लेकिन यहां मजदूरी राशि को तीन गुना घटाकर मटेरियल की राशि को दोगुना बढ़ाया गया यानी 80 प्रतिशत राशि मटेरियल और 20 प्रतिशत राशि मजदूरी में खर्च होना बताया गया। रात में जेसीबी लगाकर काम कराया गया। गांव के सरपंच ने ही मामले की शिकायत पूर्व विधायक से की थी। इसके बाद नई दिल्ली से टीम पहुंची थी।
जानिए, इस भ्रष्टाचार के लिए यह सब जिम्मेदार
- जिला पंचायत क्योंकि- ग्राम पंचायत अंतर्गत कार्य हुआ है। हर कार्य की मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी इनको दी गई है।
- यह कह रहे- जिपं सीईओ रेणुका श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले का विश्लेषण करने के बाद ही बता पाउंगी। कुछ दिन पहले ही रिपोर्ट मिली है।
- जनपद पंचायत गुंडरदेही क्योंकि- ग्राम पंचायत में काम शुरू व पूरा होने के बाद जनपद पंचायत में जानकारी दी जाती है।
- यह कह रहे- जनपद सीईओ अश्वन पुशाम से इस संबंध में चर्चा करने संपर्क किया गया तो उन्होंने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया।
- मनरेगा विभाग क्योंकि- काम कराने फंड जारी हुआ, काम भी इनकी निगरानी में
- यह कह रहे- एपीओ ओमप्रकाश साहू ने बताया कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट में कुछ नहीं आया है। मामला पुराना है। शासन के निर्देशानुसार काम हुआ।

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