शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला बेलतरा में 77 लाख की हुई थी गड़बड़ी, उस दौरान जो जिला शिक्षा अधिकारी थे वहीं करेंगे मामले की अब जांच
बिलासपुर।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला बेलतरा में तीन साल पहले 77 लाख रुपए की गड़बड़ी हुई थी। इस दौरान आरएन हीराधर जिला शिक्षा अधिकारी थे। अब वे ज्वाइंट डायरेक्टर हो गए हैं। अब वे अपने कार्यकाल में हुई गड़बड़ी की जांच खुद कर रहे हैं।
जांच अधिकारी की नियुक्ति पर ही सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले पर तीन साल तक पर्दा डाला जाता रहा। अब जेडी इस पर कैसे कार्रवाई कर पाएंगे, यह बड़ा सवाल है।
बेलतरा स्कूल में तीन साल पहले हुई गड़बड़ी की फाइल चौथी बार खोली गई है। हर बार जांच के नाम पर फाइल एक टेबल से दूसरे टेबल तक पहुंच रही है, लेकिन इस मामले पर अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। स्कूल में गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद सबसे पहले शिवतराई स्कूल के प्राचार्य से जांच कराई गई।
प्राचार्य ने जांच रिपोर्ट में 77 लाख रुपए की गड़बड़ी का खुलासा किया। इसके बाद संचालनालय के आदेश पर 6 अधिकारियों की टीम ने दूसरी बार जांच की, इस टीम ने भी गड़बड़ी की पुष्टि की। इसके बाद डीईओ कार्यालय द्वारा जांच कराई गई और अब फिर से संचालनालय के आदेश पर जांच की जा रही है। इस बार जांच का जिम्मा हीराधर को मिला है, जो उस वक्त डीईओ थे।
जांच अधिकारी की नियुक्ति पर ही उठने लगे सवाल, 3 साल से घूम रही फाइल
जिनके कार्यकाल में गड़बड़ी वहीं कर रहे जांच
गडबड़ी के दौरान बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी आरएन हीराधर थे, अब वे ज्वाइंट डायरेक्टर हैं और इस मामले की खुद जांच कर रहे हैं। संचालनालय से फटकार के बाद इस मामले में तीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा शिक्षा विभाग ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। हालांकि हीराधर का कहना है कि उस समय उन्होंने मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी थी।
एक दिन में तीन से चार बार निकाली गई राशि
1 मई 2019 को 60784, 60504, 69180, 69180 रुपए के एक दिन में चार बिल पास हुए।
3 जून 2019 को 287144, 62414, 63507, 63507, 63507 रुपए के पांच बिल निकाले गए।
19 जुलाई को 62414, 287226, 101670 रुपए के बिल एक दिन में निकाले गए।
कोषालय के कर्मचारियों की जांच क्यों नहीं
बेलतरा स्कूल के एक ही कर्मचारी का 22 बार बिल बना कोषालय में प्रस्तुत किया और गलत तरीके से राशि का आहरण किया गया। यह खेल 11 महीने तक चलता रहा। दैनिक भास्कर के पास जो दस्तावेज हैं, उसके अनुसार कोषालय में एक दिन में एक ही व्यक्ति के नाम पर 4-4 बार बिल निकाला गया। इस मामले में कोषालय के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। इसके बाद भी कोषालय के कर्मचारियों के खिलाफ जांच क्यों नहीं की जा रही है। कोषालय के एक अधिकारी की मानें तो कोषालय में 100 रुपए के बिल में भी गड़बड़ी सामने आने पर उसे लौटा दिया जाता है, ऐसे में सवाल यह है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी पर कैसे ध्यान नहीं दिया गया।
कोषालय के अफसरों से जवाब मांगा है
जस समय गड़बड़ी हुई उस दौरान मैं जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर काम कर रहा था। गड़बड़ी की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई थी। मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई। इसकी रिपोर्ट सौंप दी गई थी। अब संचालनालय के आदेश पर गबन करने वालों पर एफआईआर दर्ज करा दी गई है। यह मेरे कार्यकाल की गड़बड़ी और इस मामले की मैं ही जांच कर रहा हूं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मैंने इस मामले पर कोषालय के अधिकारी को पत्र लिखकर जवाब मांगा है। जवाब संतोषप्रद नहीं मिलने पर कलेक्टर से शिकायत करेंगे।
- आरएन हीराधर, संयुक्त संचालक, शिक्षा विभाग

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